लगता है भगवान भी अब रूठ गए

लगता है भगवान भी अब रूठ गए

लगता है भगवान भी अब रूठ गए कहां जाएं किधर जाएं कैसे अपनों को बचाएं हवा में भी विष घुला है इंसान भी अब कहां मिला है कही है जीवन रक्षक दवाइयो की काल बजारी तो कहीं है बेड की मारामारी प्राणवायु भी अब महंगी बिग रही चारों अफरा तफरी ऐसे में ही विष्णु अब लो पुनः अवतार अब हमारी धरती हो रही जार जार युग बीते बीत गए कितने प्रहर पर कभी न आई अब जैसी सहर