बुलेट गैंग अब भी सरकार की परेशानी का सबब बना हुआ है।

बुलेट गैंग अब भी सरकार की परेशानी का सबब बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट में दिए गए एफिडेविट में कहा गया है कि बुलेट गैंग लूट, डकैती, अपहरण, वसूली जैसे अपराध करता है। पूरे राज्य में इस गिरोह का आतंक है। गिरोह के सदस्य कानपुर और आसपास की कई फैक्टरियों, शिक्षण संस्थानों, स्थानीय व्यापारियों व लोगों से जबरन वसूली करते हैं। विकास पर वर्ष 2001 में रासुका के तहत कार्रवाई की गई थी। उस पर कई बार गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है।
सरकार ने अपनी सफाई में कहा है कि विकास दुबे शातिर अपराधी था। उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी। वह पैरोल पर बाहर था। सोची-समझी साजिश के तहत उसने अपने गिरोह के लगभग 90 गुर्गों के साथ पुलिस टीम पर हमला कर आठ पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी। सरकार ने एफिडेविट में विकास दुबे पर दर्ज 64 मुकदमों का ब्योरा पेश करते हुए कहा है कि वह शातिर अपराधी था। उसने कत्ल, लूट, डकैती जैसी कई संगीन वारदात की थीं।
पुलिस पर वह पहले भी हमलावर हो चुका था। उसके लिए फिर भाग निकलने की कोशिश करना कोई हैरत की बात नहीं है। इन्हीं वजहों से उसने सड़क हादसे में वाहन के पलटने का फायदा उठाया और एक पुलिस कर्मी की पिस्टल छीनकर भाग निकला। जब पुलिस और एसटीएफ ने उसका पीछा कर समर्पण करने को कहा तो वह पुलिस बल पर फायरिंग करने लगा। जवाब में चलाई गई गोलियां उसे सामने से लगीं, जिससे वह मारा गया।

कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिस वालों को गोलियों से बींध देने वाले दहशतगर्द विकास दुबे को भले ही एसटीएफ व पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया, लेकिन उसका बुलेट गैंग अब भी सरकार की परेशानी का सबब बना हुआ है। मुठभेड़ को लेकर उठ रहे सवालों पर राज्य सरकार ने बुलेट गैंग के मुखिया विकास दुबे के आपराधिक कारनामों का ब्योरा देते हुए पूरी कार्रवाई को जायज ठहराने की कोशिश की है।