पर्यावरण प्रदूषण की संकल्पना

पर्यावरण प्रदूषण की संकल्पना

वायु जल तथा पृथ्वी के भौतिक रसायनिक अथवा जैविक लक्षणों में होने वाले परिवर्तन जिनमें की मानव जीवन दूसरी जीवित जातियों को औद्योगिक प्रतिक्रिया जीवित परिस्थितियों सांस्कृतिक संपत्ति तथा प्राकृतिक स्रोतों को हानि पहुंचाने की सामर्थ ता होती है वायु प्रदूषण वातावरण की एक ऐसी अवस्था है जिसमें कुछ ऐसे पदार्थ उपस्थित रहते हैं जो कि मनुष्यों जो धारियों और उनके वायुमंडल में कुछ अवांछित प्रभाव डालते हैं जल में बाहरी कार्बनिक तथा अकार्बनिक पदार्थ जैव पदार्थ अथवा अतिरिक्त भौतिक अवस्थाओं के बढ़ने के कारण जल के गुण बदल जाते हैं यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं और जल की उपयोगिता को कम कर देते हैं पेड़ पौधों की मृत्यु और उनके अपघटन के फल स्वरुप मृदा में कार्बनिक पदार्थ मिल जाते हैं जो कि मृदा की उर्वरता शक्ति को बढ़ाते हैं लेकिन कभी-कभी फसलों बागों के अवशेष अपने साथ बहुत से कीट और पेड़ पौधों के अनेक रोग अपने साथ लाते हैं प्रदूषण के महत्वपूर्ण कारक बेरोजगारी और जनसंख्या जैसी समस्याओं को उत्पन्न करते हैं आज पूरा संसार इस कठिनाई का सामना कर रहा है क्योंकि प्रदूषण मनुष्य के जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है इससे फसलों और पशुओं को बहुत हानि होती है केवल मनुष्य ही अधिक प्रदूषण उत्पन्न करता है रोकथाम के अलावा सरकार को कई अन्य प्रयत्न करने होंगे जिससे प्रदूषण के प्रति लोगों मैं जागरूकता उत्पन्न की जा सके