डरावने पल इतने बुरे भी नहीं होते,बशर्ते इनकी अवधि लंबी ना हो

डरावने पल इतने बुरे भी नहीं होते,बशर्ते इनकी अवधि लंबी ना हो

डरावने लम्हे किसी को रास नहीं आते।हर कोई इनसे बचकर रहना चाहता है।मगर डेनमार्क में हुए एक हालिया अध्ययन की मानें तो डरावने पल इतने बुरे भी नहीं होते,बशर्ते इनकी अवधि लंबी ना हो।छोटे डरावने पल व्यक्ति के मनोरंजन का साधन बन सकते हैं।डर के छोटे पल जब किसी भी शख्स की सामान्य शारीरिक अवस्था से कम विचलन प्रदान करते हैं तो यह डर मनोरंजक होता है।हालांकि, अवधि लंबी होने पर डर डरावना हो सकता है।डरावने पलों का लुफ्त उठाने के लिए लोग अक्सर हॉन्टेड हाउस का रुख करते हैं।आखिर डर के पलों का सामना इस रोमांच के साथ लोग क्यों करते हैं,हालांकि अध्ययन में यह बात पता लगाई गई है।आरहुस विश्वविद्यालय की एक टीम ने अध्ययन में पाया कि डर जब एक  विशिष्ट शारीरिक प्रतिक्रिया को पड़ता है,तो यह मनोरंजक हो जाता है।जैसे कि हृदय गति में बदलाव शारीरिक स्थिति में छोटा- सा विचलन लाती है।हालांकि मनोरंजन उस वक्त खराब हो जाता है,जब डर की अवधि सामान्य से ज्यादा हो जाती है। इससे व्यक्ति विचलित हो जाता है और डर उसके ऊपर हावी होने लगता है