गुम होतीपक्षियों की आवाज

गुम होतीपक्षियों की आवाज

एक समय था जब हम सभी की नींद पक्षियों की चहचहाट से खुलती थी बहुत सुहानी लगती थी वह सुबह पर अब सब कुछ बदल सा गया है अब चारों तरफ से बीजों की बनी इमारतें नजर आती हैं पक्षियों की आवाज को कभी कभी सुनाई पड़ती है पहले गीत गायब हुए फिर की गौरैया और कौवे यह अच्छा संकेत नहीं है प्रकृति में जितने भी जीव हैं उनका सब अपना अलग महत्व है पक्षियों की आवाज के बिना यह प्रकट सुनी है इसीलिए हम सभी को छतों और बालकनी में पक्षियों के लिए दाना और पानी रखना चाहिए कुछ ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि पक्षी अपना घोंसला बनाकर के प्रजाति को आगे बढ़ा सकें और अपनी आवाज से हमारी सुबह सुहानी बना सके