क्या फोटोग्राफी लम्हों के आनंद को छीन लेती है

क्या फोटोग्राफी लम्हों के आनंद को छीन लेती है

कौन सी ऐसी सुंदर जगह है जहां आप गए हैं जब आप वहां गए थे तो आपने वहां की तस्वीरें ली थी पर जो आप तस्वीरें नहीं देख पाएंगे वह है पीछे खड़े वही तस्वीरें लेने वाले दूसरे लोग ऐसी कई सौ हज़ार तस्वीरें हर सप्ताह ली जाती होंगी इंस्टाग्राम पर जब तस्वीरों को देखने लगे तो पाएंगे कि जो तस्वीरें मैंने डाली है वैसी ही तस्वीरें वहां मौजूद तस्वीरें लेते हुए कुछ लम्हों में हमेशा लगता है कि हम स्थलों को स्वयं की आंख से देखने का अनुभव नहीं कर पाते जब मैं तस्वीर खींचता हूं मुझे ऐसी बहुत सारी चीजें दिखती हैं

जिन पर मैं ज्यादा समय तक चर्चा नहीं कर सकता इस दुनिया की सुंदरता की तस्वीरें लेना मेरे लिए चहेते व्यक्ति का चित्र बनाने समान होता है हम कैमरे के पीछे तस्वीरें ले रहे होते हैं तो हमें उन अनुभवों में बहुत आनंद आता है पर हम सब सोशल मीडिया को अपनी यात्राओं और जिंदगी की तस्वीरें को बांटने में उचित जगह मानते हैं हम केवल दुनिया को देखे हुए हिस्सों कि नहीं पिक दिन अनुभवों को बांटते हैं शोध से पता चलता है कि इससे लोगों को अपनी जिंदगी के शुरू में पन का एहसास कम होता है


वैसे हम सब कहकर मैं आपको तस्वीरें खींचने को लेकर हतोत्साहित नहीं कर सका बेशक दुनिया की हर एक की आवाज डिस्टिक ओं की जरूरत है आपकी भी पदमा समझना चाहती हूं कि फोन और कैमरे की हरदम आवश्यकता नहीं होती आप उन्हें एक पल के लिए पद से हटाए पल मैं जीने और उसे क्लेश महसूस करने के लिए क्या पता कल आप ऐसी अद्भुत जगहों पर जहां कैमरा या फोन ना ले जा सके वहां इनकी मना हो जहां कैमरा फोन न ले जा सके वह मना ही हो क्या आपको बेचैन करेगा बंधन लगेगा आराम मिलेगा या नहीं तस्वीरें ले रहे हैं तो थोड़ा रुकिए गहरी सांस लीजिए आसपास देखिए क्या आप क्या देख रहे हैं क्या आप उन लम्हों को जी पा रहे हैं याद के लिए यह लम्हे दोबारा नहीं आने वाले फोटोग्राफी एक सुंदर लम्हे का भाग हो सकती है पर उसे अपने वास्तविकता के बीच बांधा ना बनने दें समझदारी से तस्वीर कीजिए सुंदर लम्हों को नाखून क्यों इसलिए क्योंकि आप पल तस्वीर लेने में व्यस्त थे