आत्मनिर्भरता क्या है

आत्मनिर्भरता क्या है

एक छोटी सी चींटी लंबा सफर तय करके अपने भोजन जूटाती है उसकी आदमी भरता चमत्कार करती है वह हर किसी पर निर्भर नहीं उसे स्वयं पर विश्वास है चींटी सी काया का संदेश विराट है स्वयं के प्रयास और स्वयं पर विश्वास से आत्मनिर्भर बन सकते हैं

आत्मनिर्भरता का भाव भारत की उदार संस्कृति का स्वाभाविक स्वरूप है हमारे धर्म ग्रंथों और पौराणिक कहानियों के अनेक प्रसंग आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करते हैं स्वयं पर निर्भर व्यक्ति के भाग्य में जो भी दे देता कभी नहीं आती वह सदैव देने की स्थिति में रहता है

 

भागने का स्वभाव खत्म हो जाता है हमारी जीव तथा कम सिलता आत्मनिर्भरता के भाव को पुष्ट करती हैं हम स्वयं अपने भाग्य को बच सकते हैं स्वयं अपनी हथेली की रेखाओं को परिभाषित कर सकते हैं यह सब पुरूषार्थ से ही होता है

एक चिड़िया बच्चों को जन्म देती है जन्म देने के पश्चात उन्हें दाना खिलाती है बच्चे पूर्ण रूप से मां पर निर्भर रहते हैं धीरे-धीरे बच्चों के पंख विकसित होते हैं मां उन्हें उड़ना सिखाती है बच्चे उड़ना सीख जाते हैं अब वह अम्मा को दाना लाने के लिए नहीं कहते अपितु स्वयं भोजन की व्यवस्था करते हैं

यह सब बड़ी प्रेरणा है एक पक्षी जब आत्मनिर्भर होकर जीवन यापन कर सकता है तो आखिर क्यों नहीं मनुष्य कई बार दम के वशीभूत रहकर स्वयं के संसाधन विकसित नहीं करता दूसरे पर आश्रित होना है उसे आलसी बना देता है