अमेठी के 95 प्रतिशत कापरेटिव सहकारी समितियों में नहीं है यूरिया प्राइवेट अधिक दामो पर खरीदने को मजबूर किसान

अमेठी संवाददाता राम शंकर जायसवाल की रिपोर्ट

अमेठी के 95 प्रतिशत कापरेटिव सहकारी समितियों में नहीं है यूरिया प्राइवेट अधिक दामो पर खरीदने को मजबूर किसान

अमेठी (उत्कर्ष धारा 24) | अन्ना दाता कहे जाने वाले किसान की कोई सुनने वाला है दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर है,
हा ये मामला अमेठी की है जहाँ की सांसद स्मृति ईरानी जी है जिनके दावे खोखले पड़ते जा रहे हैं आपको बता दे कि धान की फसल अपने चरम पर है जिसे यूरिया की बहुत जरूरत है विना खाद के वह कैसे तैयार हो इसके लिए किसान कापरेटिव सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे जहाँ उनको निराश होकर लौट जाना पड़ रहा है, वहीं प्राइवेट यूरिया की बात करें तो उसकी मूल्य आसमान को छू रही है गरीब किसान इन मूल्यों को अदा करने में असमर्थ है,

कोविड 19 का खतरा-:

जहाँ जिस दुकान पर यूरिया मिल भी रही है वहाँ इतनी ज्यादा भीड़ हो रही है जिससे कोविड 19 का खतरा भी है लोग सोसल डिस्टेंन्सिंग का पूरी तरह से पालन नहीं कर रहे हैं,

आखिर कब आयेगी कापरेटिव सहकारी समितियों में खाद -:

किसानों का कहना है कि जब वह कापरेटिव पर जाकर पूछताछ की जाती है तब उनको वही जबाब मिलता है कि अभी खाद आने की कोई उम्मीद नहीं है |

400 तक के मूल्य में प्राइवेट विक  रही यूरिया -:

आपको बता दे कि इस अव्यवस्था के कारण किसानों को महगाई और परिश्रम का सामना करना पड़ रहा लम्बी कतारों के बाद यूरिया 300 से लेकर 400 तक के दामों पर वेची जा रही किसान केन्द्र संचालक धड़ल्ले से इसका फायदा उठा रहे हैं, किसान  अधिक मूल्यों में यूरिया खरीदने को मजबूर है |